Friday, May 22, 2015

Truth of life

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...

बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...

पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।
awesum truth of life. .

Friday, May 15, 2015

Koi farq mat karo kisi me

मशरूफ थे सब अपनी जिंदगी की उलझनों में .
दोस्तों
जरा सी जमीन क्या हिली सबको खुदा याद आने
लगा..!"

इंसान की अमीरी क्या,
फकीरी क्या
ऊपर वाले के एक झटके की बात है प्यारे,
कल सबसे सुरक्षित वही दिखे जिनके सिर के ऊपर छत नहीं था।।
बुलँदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती हैं,
जितनी ऊँची हो इमारत,
हर वक्त खतरे में रहती है।।

Wednesday, April 29, 2015

Work as being human

जिन्दगी गुजर जाती है
एक मकान बनाने में।
और
कुदरत उफ़ तक नहीं करती बस्तियाँ गिराने में।
ना उजाड़ ए - खुदा किसी के आशियाने को,
वक़्त बहुत लगता है, एक छोटा सा घर बनाने
को...!!

Monday, April 27, 2015

Jaag ja ae insaan

नेपाल हिला, भारत हिला और हिल गया पाकिस्तान,
न मसीह आए, न अल्लाह आए और कहाँ गए भगवान ?
हैं कौन हिन्दू, कौन ईसाई और कौन है मुसलमान,
प्रकृति के आगे है बेबस हर इंसान ।।
हैं समान सब उसकी नजर में,
वहाँ नहीं चलता बाइबल, वेद और कुरान।
मत उलझ इस पाखण्ड में,
अब तो जाग जा ए मूर्ख इंसान ।।

Friday, April 24, 2015

Beautiful poem by –हरिवंशराय बच्चन

हारना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई  "अपनों से हो"
...और....
जीतना तब आवश्यक हो जाता है जब लङाई  "अपने आप से  हो"

मंजिल मिले ना मिले
ये तो मुकदर की बात है!
हम कोशिश भी ना करे
ये तो गलत बात है...

Nice quotes

पहले मैं होशियार था,
इसलिए दुनिया बदलने चला था,,,
आज मैं समझदार हूँ,
इसलिए खुद को बदल रहा हूँ…।।
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वक़्त अच्छा ज़रूर आता है;
मगर वक़्त पर ही आता है!
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कागज अपनी किस्मत से उड़ता है;
लेकिन पतंग अपनी काबिलियत से!
इसलिए किस्मत साथ दे या न दे;
काबिलियत जरुर साथ देती है!
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दो अक्षर का होता है लक;
ढाई अक्षर का होता है भाग्य;
तीन अक्षर का होता है नसीब;
साढ़े तीन अक्षर की होती है किस्मत;
पर ये चारों के चारों चार अक्षर, मेहनत से छोटे होते हैं!……..
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जिंदगी में दो लोगों का ख्याल रखना बहुत जरुरी है!
पिता: जिसने तुम्हारी जीत के लिए सब कुछ हारा हो!
माँ: जिसको तुमने हर दुःख में पुकारा हो!
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काम करो ऐसा कि पहचान बन जाये;
हर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जायें;
यह जिंदगी तो सब काट लेते हैं;
जिंदगी ऐसे जियो कि मिसाल बन जाये!
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भगवान की भक्ति करने से शायद हमें माँ न मिले;
लेकिन माँ की भक्ति करने से भगवान् अवश्य मिलेंगे!
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अहंकार में तीन गए;
धन, वैभव और वंश!
ना मानो तो देख लो;
रावन, कौरव और कंस!
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‘इंसान’ एक दुकान है, और ‘जुबान’ उसका ताला;
जब ताला खुलता है, तभी मालुम पड़ता है;
कि दूकान ‘सोने’ कि है, या ‘कोयले
एक दिन मैं कॉलेज से घर आने के लिये
निकला आसमान
में बादल थे…
लग रहा था कि बारिश होने वाली थी…
इसलिए सोचा कि घर जल्दी पहुँच जाऊँ पर रास्ते
में
ही बारिश शुरू हो गई और मैं भीग गया…!!!
.
घर जाते ही बड़ी बहन ने कहा -: “थोड़ी देर रुक
नही सकते थे…??”
.
बड़े भाई ने कहा -: “कहीं साइड में खड़े
हो जाते …??”
.
पापा ने कहा -: “खड़े कैसे हो जाते..!! जनाब
को बारिश में भीगने का शौक जो है..??”
.
.
.
इतने में मम्मी आई और सिर पर टॉवेल रखते हुऐ
बोली -: “ये बारिश भी ना… थोड़ी देर रुक
जाती तो मेरा बेटा घर आ जाता…!!!”
‘माँ’ तो ‘माँ’ ह�

Nice lines

जरूरी नही कि जिनमे सांसें नही वो ही मुर्दा है..
जिनमे इंसानियत नही है, वो भी तो मुर्दा ही है..!!