Friday, February 12, 2016

~ ~ * बहाने Vs सफलता *~ ~


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1- मुझे उचित शिक्षा लेने का
अवसर नही मिला...

उचित शिक्षा का  अवसर
फोर्ड मोटर्स के मालिक
हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।
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2- मै इतनी बार हार चूका ,
अब हिम्मत नही...

अब्राहम लिंकन 15 बार
चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।
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3- मै अत्यंत गरीब घर से हूँ ...

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी
गरीब घर से थे ।
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4- बचपन से ही अस्वस्थ था...

आँस्कर विजेता अभिनेत्री
मरली मेटलिन भी बचपन से
बहरी व अस्वस्थ थी ।
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5 - मैने साइकिल पर घूमकर
आधी ज़िंदगी गुजारी है...

निरमा के करसन भाई पटेल ने भी
साइकिल पर निरमा बेचकर
आधी ज़िंदगी गुजारी ।
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6- एक दुर्घटना मे
अपाहिज होने के बाद
मेरी हिम्मत चली गयी...

प्रख्यात नृत्यांगना
सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।
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7- मुझे बचपन से मंद बुद्धि
कहा जाता है...

थामस अल्वा एडीसन को भी
बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।
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8- बचपन मे ही मेरे पिता का
देहाँत हो गया था...

प्रख्यात संगीतकार
ए.आर.रहमान के पिता का भी
देहांत बचपन मे हो गया था।
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9- मुझे बचपन से परिवार की
जिम्मेदारी उठानी पङी...

लता मंगेशकर को भी
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी
उठानी पङी थी।
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10- मेरी लंबाई बहुत कम है...

सचिन तेंदुलकर की भी
लंबाई कम है।
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11- मै एक छोटी सी
नौकरी करता हूँ ,

इससे क्या होगा...
धीरु अंबानी भी
छोटी नौकरी करते थे।
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12- मेरी कम्पनी एक बार
दिवालिया हो चुकी है ,
अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा...

दुनिया की सबसे बङी
शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी
दो बार दिवालिया हो चुकी है ।
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13- मेरा दो बार नर्वस
ब्रेकडाउन हो चुका है ,
अब क्या कर पाउँगा...

डिज्नीलैंड बनाने के पहले
वाल्ट डिज्नी का तीन बार
नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।
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14- मेरी उम्र बहुत ज्यादा है...

विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन
के मालिक ने 60 साल की उम्र मे
पहला रेस्तरा खोला था।
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15- मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है
पर लोग अस्वीकार कर देते है...

जेराँक्स फोटो कापी मशीन के
आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने
अस्वीकार किया था पर आज
परिणाम सामने है ।
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16- मेरे पास धन नही...
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन
नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था
उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।
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17- मुझे ढेरो बीमारियां है..

वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी
अनेको बीमारियो मे थे |
राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर
काम नही करते थे।
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आज आप जहाँ भी है
या कल जहाँ भी होगे
इसके लिए आप किसी और को
जिम्मेदार नही ठहरा सकते ,
इसलिए आज चुनाव करिये -
सफलता और सपने चाहिए
या खोखले बहाने ...

बेहतरीन सन्देश...
     चाहे फॉर्वड ना करें पर अपने जीवन में अमल जरूर करे

Monday, February 1, 2016

::$::: माँ बहुत झूठ बोलती है :::$:::


सुबह जल्दी जगाने को,सात बजे को आठ कहती है। नहा लो,नहा लो,के घर में नारे बुलंद करती है। मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।छोटी-छोटी परेशानियों पर बड़ा बवंडर करती है। ....माँ बहुत झूठ बोलती है।।
थाल भर खिलाकर,तेरी भूख मर गयी कहती है।जो मैं न रहूँ घर पे तो,मेरी पसंद की कोई चीज़ रसोई में उससे नहीं पकती है।मेरे मोटापे को भी,कमजोरी की सूजन बोलती है। .........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए, बोल कर,मेरे साथ दस लोगों का खाना रख देती है।कुछ नहीं-कुछ नहीं बोल,नजर बचा बैग में,छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है। .........माँ बहुत झूठ बोलती है।। टोका-टाकी से जो मैं झुँझला जाऊँ कभी तो,समझदार हो,अब न कुछ बोलूँगी मैं,ऐंसा अक्सर बोलकर वो रूठती है।अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती हो जाती है। .........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाऊँगी, सारी फ़िल्में तो टी वी पे आ जाती हैं, बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है,बहानों से अपने पर होने वाले खर्च टालती है।.......माँ बहुत झूठ बोलती है।।
मेरी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ा कर बताती है।
सारी खामियों को सब से छिपा लिया करती है।उसके व्रत,नारियल,धागे, फेरे,सब मेरे नाम,तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है।..माँ बहुत झूठ बोलती है।।
भूल भी जाऊँ दुनिया भर के कामों में उलझ,उसकी दुनिया में वो मुझे कब भूलती है।मुझ सा सुंदर उसे दुनिया में ना कोई दिखे,मेरी चिंता में अपने सुख भी किनारे कर देती है।.....माँ बहुत झूठ बोलती है।।
उसके फैलाए समानों में से जो एक उठा लूँ खुश होती जैसे, खुद पर उपकार समझती है।मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे उदास होकर,सोच-सोच अपनी तबियत खराब करती है। ..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
"हर माँ को समर्पित"।

Saturday, January 16, 2016

मरने के 47 दिन बाद ऐसे आत्मा पहुंचती है यमलोक...

नई दिल्ली (15 जनवरी): गरुड़ पुराण प्रमुख हिंदू धर्म ग्रंथों में से एक है। इसमें बताया गया है कि कैसे मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक तक जाती है। आज हम आपको गरुड़ पुराण में लिखी कुछ ऐसी ही खास व रोचक बातें बता रहे हैं...
> गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस मनुष्य की मृत्यु के समय उसकी सभी इंद्रियां (बोलने, सुनने आदि की शक्ति) नष्ट हो जाती हैं और वह जड़ अवस्था में हो जाता है, यानी हिल-डुल भी नहीं पाता।
> उस समय दो यमदूत आते हैं। उनका चेहरा बहुत भयानक होता है, नाखून ही उनके शस्त्र होते हैं। यमराज के दूतों को देखकर प्राणी भयभीत होकर मल-मूत्र त्याग करने लग जाता है। उस समय शरीर से अंगूष्ठमात्र (अंगूठे के बराबर) जीव हा हा शब्द करता हुआ निकलता है, जिसे यमदूत पकड़ लेते हैं।
> यमराज के दूत उस शरीर को पकड़कर उसी समय यमलोक ले जाते हैं। रास्ते में थकने पर भी उसे यमराज के दूत डराते हैं। यमदूतों की भयानक बातें सुनकर पापात्मा जोर-जोर से रोने लगती है, किंतु यमदूत उस पर बिल्कुल भी दया नहीं करते।
> इसके बाद वह अंगूठे के बराबर शरीर यमदूतों से डरता और कांपता हुआ, कुत्तों के काटने से दु:खी हो, अपने पापों को याद करते हुए चलता है। यमदूत उसकी पीठ पर चाबुक मारते हुए उसे आगे ले जाते हैं। वह जीव जगह-जगह गिरता है और फिर चलता है। इस प्रकार यमदूत जीवात्मा को अंधकार वाले रास्ते से यमलोक ले जाते हैं।
> गरुड़ पुराण के अनुसार, यमलोक 99 हजार योजन (योजन वैदिक काल की लंबाई मापने की इकाई है। एक योजन बराबर होता है चार कोस यानी 13-16 कि.मी) है। वहां यमदूत उसे सजा देते हैं। इसके बाद वह जीवात्मा यमराज की आज्ञा से यमदूतों के साथ फिर से अपने घर आती है।
> घर आकर वह जीवात्मा अपने शरीर में पुन: प्रवेश करने की इच्छा करती है परंतु यमदूत के बंधन से वह मुक्त नहीं हो पाती और भूख-प्यास के कारण रोती है। पुत्र आदि जो पिंड दान करते हैं, उससे भी प्राणी को तृप्ति नहीं होती, क्योंकि पापी लोग को दान, श्रद्धांजलि द्वारा तृप्ति नहीं मिलती।
> पापात्मा के पुत्र आदि यदि पिंडदान नहीं देते हैं, तो वह प्रेत रूप हो जाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य की मृत्यु के बाद 10 दिन तक पिंडदान अवश्य करना चाहिए। उस पिंडदान के प्रतिदिन चार भाग हो जाते हैं। उसमें दो भाग तो पंचमहाभूत देह को पुष्टि देने वाले होते हैं, तीसरा भाग यमदूत का होता है तथा चौथा भाग प्रेत (आत्मा) खाता है। नौवें दिन पिंडदान करने से प्रेत (आत्मा) का शरीर बनता है, दसवें दिन पिंडदान देने से उस शरीर को चलने की शक्ति प्राप्त होती है।
> शव को जलाने के बाद पिंड से अंगूठे के बराबर का शरीर उत्पन्न होता है। पहले दिन पिंडदान से मूर्धा (सिर), दूसरे दिन से गर्दन और कंधे, तीसरे दिन से ह्रदय, चौथे दिन के पिंड से पीठ, पांचवें दिन से नाभि, छठे और सातवें दिन से कमर और नीचे का भाग, आठवें दिन से पैर, नौवें और दसवें दिन से भूख-प्यास आदि उत्पन्न होती है। ऐसे पिंड शरीर को धारण कर भूख-प्यास से व्याकुल प्रेत ग्यारहवें और बारहवें दिन का भोजन करता है।
> यमदूतों द्वारा तेरहवें दिन प्रेत (आत्मा) को बंदर की तरह पकड़ लिया जाता है। इसके बाद 47 दिन लगातार चलकर आत्मा यमलोक पहुंचती है। इस प्रकार मार्ग में सोलह पुरियों को पार कर पापी जीव यमराज के घर जाता है।
> इन सोलह पुरियों के नाम इस प्रकार हैं- सौम्य, सौरिपुर, नगेंद्रभवन, गंधर्व, शैलागम, क्रौंच, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापाद, दु:खद, नानाक्रंदपुर, सुतप्तभवन, रौद्र, पयोवर्षण, शीतढ्य, बहुभीति। इन सोलह पुरियों को पार करने के बाद आगे यमराज पुरी आती है। पापी प्राणी यम, पाश में बंधे हुए मार्ग में हाहाकार करते हुए अपने घर को छोड़कर यमराज पुरी जाते हैं।

Monday, December 21, 2015

love your parents

✏धयान से पढ़ना आँखों में पानी आ जाएगा.

 बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया 
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ...

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है .....
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ...

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ....
पता तो चले कितना माल छुपाया है .....
माँ से भी ...

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ....
मैंने जूता निकाल कर देखा .....
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ...
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ...

जैसे ही कुछ दूर चला ....
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ....
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था .....

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी .....

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ....

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था 
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ......
ओह....अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ...........!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ...
और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .."
मैं अब समझा कितने चलेंगे

......तीसरी पर्ची ..........
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ...
पढ़ते ही दिमाग घूम गया.....
पापा का स्कूटर .............
ओह्ह्ह्ह

मैं घर की और भागा........
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ....

मैं घर पहुंचा .....
न पापा थे न स्कूटर ..............
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ....

मैं दौड़ा .....
और
एजेंसी पर पहुंचा......
पापा वहीँ थे ...............

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..

.....नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल...

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से ...।।

"माँ" एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है...

और

"पापा" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है........Always Love Your Parents�� 
अगर दिल के किसी कोने को छू जाये तो फोरवर्ड जरूर करना .  〰〰〰〰〰〰〰 

Monday, December 14, 2015

Ram bhakt hanumaan

सुन रामभक्त हनुमान
सुन सुन रामभक्त हनुमान |
दे दे अपने चरणों में स्थान ||
करूँगा मै तेरा गुणगान |
सुन सुन रामभक्त हनुमान ||
मन में मैंने ठान लिया है |
अपना दाता मान लिया है ||
बस दे दे चरणों में स्थान |
सुन सुन रामभक्त हनुमान ||
इतनी इल्तजा है प्रभु मेरी |
नाथ नहीं करना अब देरी ||
दिल में ग्रहण करो स्थान |
सुन सुन रामभक्त हनुमान ||
चिंता तुम्हारी बिन वजह है |
दिल में मेरे बहुत जगह है ||
करूँगा हरपल तेरा सम्मान |
सुन सुन रामभक्त हनुमान ||
...................श्याम
_/l\_ मारुति नंदन नमो नमः कष्ट भंजन नमो
नमः
असुर निकंदन नमो नमः श्रीरामदूतम नमो
नमः _/l\

Saturday, November 28, 2015

एक मित्र ने बहुत ही सुंदर पंक्तियां भेजी है, फारवर्ड करने से खुद को रोक नहीं पाया ...

नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात!
       बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!
पानी आँखों का मरा, मरी शर्म और लाज!
      कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!!
भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास!
     बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!
मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश!
      बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!!
बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान!
      पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!!
पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग!
      मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!!
फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर!
     पापी करते जागरण, मचा-मचा   कर शोर!
पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!
     भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!
अच्छी लगे तो आगे शेयर कीजिए नहीं तो रहने दिजिये। धन्यवाद॥॥॥

Saturday, August 15, 2015

What is shivling ..? Do u know ???

शिव लिंग पूजा का राज जुडा है उत्तरकाण्ड से

शिव की यागीश्वर में तपस्या
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जैसे के आपको ज्ञात होगा और कथा आपने सुनी होगी !

जब दक्ष्य प्रजापति ने कनखल के समीप यज्ञ किया था ! यहाँ पर शिव के अतिरिक्त सबको इस यज्ञ में बुलाया गया था! शिव की अर्धांगिनी पार्वती जो जब यह पता चला और अपने पति के तिरस्कार को देखकर वो वो कनखल जाकर यज्ञ के हवन में कूद पड़ी और देह त्याग कर दिया !

शिव ने कैलाश के यह बात जान दक्ष प्रजापति का यज्ञ विध्वंश कर सबका नाश कर दिया! और की भस्म को आच्छादित कर झाकर सैम (अल्मोड़ा जिले में स्थिति) में तपस्या की! झाकर सैम को तब से देवदारु वन के आच्छादित बताया है !  झाकर सैम जागीश्वर पर्वत में है !

कुमाउ के इस पर्वत में वशिष्ठ मुनि अपनी पत्नियों सहित रहते थे ! एक दिन ऋषि ने पत्नियों ने कुशा और व समिधा  एकत्र करते हुए शिव को रख मले हुए नगनवस्था में तपस्या करते  देखा ! गले में साप की माला थी और आँखे बंद, मौन धारण किये हुए, चित उनका काली (पत्नी) के शोक में संतप्त था! ऋषि के सित्र्याँ  उनके सौंदर्य को देखकर उनके चारो और एकत्र हो गयी!

सप्त ऋषियों की की सातो स्त्रियाँ जब रात में न लौटी तो प्रातः काल वे दूदने को गए ! देखा, तो शिव समाधि लिए है, और स्त्रियाँ उनके चारो और बेहोश पड़ी है

ऋषियों का शिव को शाप देना
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यह देख कर ऋषियों के मन में विचार आया की शिव ने उनकी स्त्रियों की बेजज्ती की है, शिव को शाप दिया "जिस इन्द्रय यानी जिस वस्तु से तुमने यह अनौचित्य किया है, वह लिंग) भूमि में गिर जाय "!

तब शिव ने कहा "

"तुमने मुझे आकरण शाप दिया है, लेकिन तुमने मुझे संकित अवस्था में पाया है, इस लिए में तुमारे शाप का विरोध नहीं करूँगा ! मेरा लिंग धरती पर गिरेगा और तुम सातो सप्त ऋषि के रूप में आकाश में चमकोगे" अतः शिव ने शाप के अनुसार अपने लिंग को धरती में गिराया !

सारी धरती शिव